जीवन!
अनुभवों की लंबी शृंखला,
महसूस करना किसी को
अपने हृदय में ;
देखना किसी को
स्वयं से ही जुड़ा हुआ;
सोचना किसी को
कभी यूँ ही अचानक ;
सीखना किसी से
हर पल जीने की अदा ;
लड़ना किसी से
छोटी सी बात पर ;
जताना किसी का
अधिकार मुझ पर;
डांटना किसी का
मेरी ग़लतियों पर;
करना किसी के लिए
अपने ही मन से बातें ;
ये लगाव जो तुमसे है
नया नहीं है शायद,
जन्मों का बंधन लगता है |
- दीपक(15.01.2004), मेरे जन्मदिवस पर
बंधन